Monday, June 6, 2022
प्रजा के अधिकार औऱ ज़िम्मेदारियाँ।
हम जिस देश में रहते हैं, वहाँ का क़ानून, वहाँ का परियावरण,वहां की भाषा,वहाँ की मुद्रा सभी बातों को ज़हन में ऱखते हुये ही अपने विचार प्रकट करने चाहिये।आज़ादी के नाम पर क़िसी भी मंच पर खड़े होकर कुछ भी बोलने से पहले हमें अपने ही विचारों का गहन अध्धयन करना चाहिये।जिस प्रकार हम प्रभु की भक्ति करते हैं उसी प्रकार हमें देशभक्ति एवं देशप्रेम में भी लीन होना चाहिये।जो बच्चे अपने देश से ग़द्दारी करते हैं वो अपने माता-पिता पर भी निःसंकोच हाथ उठा सकते हैं।फ़िर बाबाजी का बुलडोज़र चलता है तो पूरे ख़ानदान को झेलनी पड़ती है।अब आप को सोचना है कि प्यार फ़ैलाना अच्छा है या नफऱत फ़ैलाना अच्छा है।बाक़ी तो महादेव की इच्छा है।होगा वही जो राम रचराखा।जय श्री राम,हर-हर महादेव।
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