Sunday, August 25, 2024

देवदत्त

राम नगर की क्राइमब्रांच में काफ़ी चहल-पहल है।एक अजीब केस आया है।पहाड़ी पर एक नरकंकाल मिला है,जो कि काफ़ी पुराना है।हेडऑफिस का दवाब भी है कि जल्द से जल्द इसे सुलझाया जाए।इसे सुलझाने के लिये मुम्बई क्राइमब्रांच से इंस्पेक्टर देवदत्त को बुलाया गया है,जो अपने काम मे माहिर है,औऱ सख़्त भी है।                                             देवदत्त के आने से सभी एलर्ट हो जाते हैं।देवदत्त पहले कंकाल मिलने की जगह पर मुआयना करता है।देवदत्त की एक कमज़ोरी है,समोसा।देवदत्त,"तुम्हारे यहाँ समोसे नहीँ मिलते हैं क्या?"जूनियर,"मिलते हैं न सर"देवदत्त,"ठीक है,तो मंगा लो जब पेट मे समोसा नहीँ जाता साला दिमाग़ भी काम नही करता है,औऱ हाँ हरी चटनी ज़रूर लेते आना"देवदत्त समोसे ख़ाता हुआ जगह देखता है औऱ वापिस थाने का जाता है।वो कंकाल की फ़ाइल मंगाता है।मेज पर फाईल, समोसे,चाय ऱखी है।देवदत्त फाईल देखता है औऱ कहता है कि तुम लोगों की कार्यवाही बहुत धीमी है,चलो अब काम पर लग जाओ।देवदत्त कंकाल का x रे करवाने को कहता है।।                           एम्सरे से पता चलता है कि इसका तो उल्टा हाथ आधा है ही नहीँ।डॉक्टर बताता है कि कंकाल कम से कम दस साल पुराना है।देवदत्त पूरे इलाके मे खोजबीन करता है तो पता चलता है कि एक लड़का जो 15 साल का था अचानक लापता हो गया था।पूछताछ में उस लड़के का घर मिल जाता है।देवदत्त लड़के के पिता से मिलकर कंकाल की जानकारी देता है औऱ बताता है कंकाल का हुलिया तुम्हारे बेटे से मिलता है।पिता रोने लगता है,देवदत्त उसे विश्वाश दिलाता है कि वो उसके बेटे के कातिल को जरूर पकड़ेगा।वो बताता है कि एक दिन उसका बेटा खेत पर गया था फ़िर वापस नहीँ आया।बचपन से उसका उलटा हाथ कोहनी से आधा ही था।                                                            देवदत्त को पता चलता है कि पुराने प्रधान का खेत मिला होने के कारण अक्सर उसकी नोकझोंक होती रहती थी।प्रधान क्रमनल प्रवर्ति का है।देवदत्त चाय समोसे का आनन्द ले रहा है साथ ही केस पर भी चर्चा हो रही है,तभी कुछ गुंडे टाईप के कुछ लोग ऑफिस में आ जाते हैं औऱ देवदत्त को धमकाते हुए कहते हैं कि परधानजी ने बुलाया है।देवदत्त हँसते हुए कहता है कि अरे इसी दिन का तो इंतज़ार था मुझे, परधानजी से कहना चाय समोसे तैयार रखना ,हम आते हैं शाम को।वो लोग चले जाते हैं।जूनियर बताते हैं कि ये बहुत ख़तरनाक आदमी है हमें सावधान रहना होगा।देवदत्त'"अगर इतना डरते हो तो क्राइमब्रांच में क्यो आ गए कोई औऱ नोकरी कर लेते,चलो अब देखता हूँ कितना खतरनाक है ये"                                      देवदत्त अपनी टीम के साथ परधानजी के घर पहुँच जाता है,बातों-बातों में प्रधान देवदत्त को धमकी देते हुए इस केस को बंद करने को कहता है।जाते हुए देवदत्त कहता है,"आपके यहाँ के समोसे बहुत अच्छे हैं लेकिन हमारे यहाँ भी बहुत अच्छे चटनी के साथ मिलते हैं, हाँ एक बात औऱ आप नींद पूरी करलो क्योकि जेल में मच्छर बहुत हैं साले सोने नहीँ देते हैं, अगली मुलाकात अब जेल में ही होगी।"देवदत्त टीम को लेकर चला जाता है।एक दिन गाँव का ही एक आदमी जो कि मुख़बिर है बताता है कि उस लड़के को इसी ने गला दबा कर मारा था।तो फिर पहले क्यो नहीँ बताया तुमने,के बार कोशिश की बताने की मग़र यहाँ सब प्रधान के डर की वजह से मुझे चुप रहने को कहते थे औऱ बाहर से ही वापस भेज दिया कर देते थे।                  देवदत्त प्रधान का अरेस्ट वारंट निकलवाता है औऱ जल्द ही उसे हवालात में लाकर कड़ी पूछताछ करता है।एक दिन प्रधान के गुंडे देवदत्त को अकेला देखकर हमला कर देते हैं मगर देवदत्त सभी की अच्छी तरह पिटाई कर देता है औऱ सब को अंदर बंद कर देता है।पुलिस की पिटाई से प्रधान टूट जाता है औऱ अपना जुर्म कबूल लेता है।देवदत्त उसे कोर्ट में पेश करता है जहाँ से उसे उम्रकैद होती है।पिता को आखिरकार न्याय मिलता है।देवदत्त वापिस मुंबई आ जाता है।यही कहानी आ अंत है।"कहानी ,शहर,घटना सभी काल्पनिक है"।