Wednesday, January 1, 2020

नज़र

नज़र में उठाना नज़र में गिराना ये औरत के हाथ में है।औरत कहे तो आदमी हीरो है औरत कहे तो आदमी ज़ीरो है।आदमी का चरित्र तब तक कोई नहीं बता सकता जब तक औरत ज़ुबा न खोले।घर बनाने वाली औरत ज़ुबा कम खोलती है और घर तोड़ने वाली औरत कभी जुबान रोकती नहीं।हमारे चरित्र में हमारा ही हाथ होता है परंतु समाज के सामने लाना या न लाना पत्नी के हाथ में होता है।इस को ग्रहस्ती कहते हैं।घर का संतुलन औरत के हाथ में ओर बाहर का संतुलन आदमी के हाथ में होता है।बस इतना ही समजना है।

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