रफ्तार तेज ही रखना पर इतनी तेज मत रखना की अपने न छूट जाएं क्योकि आगे निकल कर अक्सर लोग अपनों को ही भूल जाते हैं।सफलता तभी सफल है जब अपने साथ हों,मगर कुछ लोग सफल होने के बाद अकेले रहना ही सही समझते हैं।क्या कोई सफल होकर ओर अपनों को अलग करके खुश रह सकता है?पैसा कितना भी कमालों पर अपनों से प्यार करना मत भूलो ।हमारा असली धन हमारे अपने ही होते हैं।इन्हें पहचानों ओर इन से प्यार करो फिर आगे रफ्तार तेज करो तभी सफलता का असली आनंद आयगा।
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