Tuesday, May 30, 2023

काला दिन।

आज एक बार फ़िर मानवता को शर्मसार होते हुए देख़ा, देख़ा कि किस तरह लोग एक लड़की का दिनदहाड़े क़त्ल को अपनी आँखों मे बन्द कर के ले गये।हम-लोग बस इसी तनाव में ज़िन्दगी गुज़ार देते हैं कि अगर ऐसा हुआ तो क्या होगा अगर वैसा हुआ तो क्या होगा,परन्तु अफ़सोस कि एक हादसा हुआ औऱ मानवता आँख चुराकर चली गई।ये क्या हो रहा है समाज़ को,क्या इसी की ख़ातिर हम बच्चों को डराकर-धमकाकर ऱखते हैं, औऱ वही बच्चे जब ग़लत रास्ते पर चल पड़ते हैं तो उन्हें इतनी बड़ी सज़ा मिलती है,कि हम ख़ुद से भी नज़र मिलाने से डरते हैं।जो लोग उस समय नज़र चुराकर भागे वो ज़रा अब आईने के सामने खड़े होकर ख़ुद से पूछें कि अब उन्हें कैसा लग रहा है?क्या वो अपने बच्चों को भी ऐसे ही सड़क पर मरते हुये भाग आयेंगे?एक बार सोचें ज़रूर।

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