Saturday, September 7, 2024

क्रोध

अनन्तकाल से क्रोध आदमी के विनाश का,शत्रुता का कारण बना हुआ है।क्रोध से न क़िसी को क़भी कोई लाभ हुआ है न ही कोई उतपत्ति हुई है,फ़िर भी न जाने क्यों सत्य जानते हुये भी आदमी इस क्रोध रूपी राक्षस के कारण कितने प्रिये रिश्तों से हाथ धो बैठा है।                                     आज के काल में लालच,लेन-देन,उधारी,मज़बूरी औऱ न जानें कितने ऐसे कारण हैं जिस वजह से अपने-अपनों से दूर होते जा रहे हैं।व्यर्थ की मोहमाया के कारण आपस मे दीवारें खड़ी हो रहीं हैं।एक-दूसरे के साथ तो दूर पास-पास भी रहना गवारा नहीँ है।क़भी सोचा है कि हम किस दिशा में जा रहे हैं या हम अपने बच्चों को किस दिशा मे धकेल रहे हैं?ज़रा सोचिए।                 क्रोध के रहते अपना भविष्य अपने रिश्ते बिगाड़ने हैं या स्वम् को अपने बच्चों को बेहतर भविष्य अनमोल रिश्ते देने हैं।रुपये कमाये जाते हैं ख़र्च किये जाते हैं मग़र रिश्ते सिर्फ़ कमाये जाते हैं ख़र्च सिर्फ़ अपनों पर किये जाते हैं।तुम्हें रिश्ते चाहिये या दौलत।सोचना तुम्हें है।रिश्तों में ये भी हिसाब नहीँ ऱखते कि किसने कम किया या किसने ज्यादा किया,बस दोंनो हाथ खोल कर दिया जाता है।हिसाब तो केवल व्यापार में होता है औऱ जहाँ व्यापार होता है वहाँ रिश्ते नहीँ टिकते हैं।   समझ लो तो सब बच जायेगा वरना सब बिखर जायेगा।

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