Friday, January 16, 2026
बी.सी."हास्य-व्यंग्य"
मेरी बला से, सच बात तो यह है कि हमारा समाज इतना गन्दा हो गया है कि साला कोई भी लौंडा-लौंडिया अनपड़-ज़ाहिल ही नहीँ दिखता है जिसे देख़ो अपने-आप में हर विषय में पी.एच. डी. करे हुए है,औऱ हद तो तब होती है जब बिना बात के अपनी राय देने लगता है मानो सारी बक चोदी"बी.सी."की जिम्मेदारी इसी ने उठा रख्खी हो।औऱ आप यक़ीन मानना बहुत तो हमारे बीच में ही ऐसे जीव विचर रहे हैं या ये मानलो माँ सरस्वती की उन पर ऐसी अनुपम कृपा है कि बिना साँस लिये कई दिन तक लगातार बोल सकते हैं औऱ हद तो यह है कि साले वीरगति को भी प्राप्त नहीँ होते हैं, सच बताऊँ तो ऐसे लोगों से मेरी बहुत फटती है,साले साँस लेना ही भूल जाते हैं चुपने का नाम ही नहीँ लेते हैं। खैर क्या कर सकते हैं, दोस्ती हो रिश्तेदारी हो या कोई भी अन्य हो न चाहते हुए भी बहुत से लोगों का सामना करना ही पड़ता है।शायद इन छिछोरों को ये भी नहीँ पता है कि हर आत्मा निरोगी पैदा होती है परन्तु पृथ्वी पर विचर रहे इन बक चोदों की वजह से न जानें कितनी बेगुनाह आत्मायें आई.सी.यू.भर्ती हो जातीं हैं कितनों के ब्रेन फट जाते हैं कितने अल्प आयु में परलोक सिधार जाते हैं, मग़र मज़ाल है जो इन जैसों की बक चोदी पर जरा भी विराम लग जाये,न भाई न ऐसा नहीँ हो सकता है दुनियाँ में ज्ञान की कमी जो रह जायेगी।सारा ज्ञान यही तो अपनी तीस गज की लंबी ज़ुबान से बाटते हैं।धरती पर सारे ज्ञान बाटने का ठेका ऊपर वाले ने इन जैसे हरामखोरों को ही तो दे रख्खा है।अपनी ज़िन्दगी का सारा सुकून प्राप्त करने के बाद दूसरे की ज़िन्दगी को नरक बनाने की जिम्मेदारी भी तो इन्हीं ज़ुबानों के तस्करों ने उठा रख्खी है। यार यक़ीन मानियो अगर योगी जी की जगह कोई औऱ होता न तो इन जैसों को तो चुन-चुन कर समेट लेता,बड़ी लम्बी लिस्ट बना रख्खी है पता न कब मौका मिलेगा-मिलेगा भी या नहीँ।सच बात तो ये है इन्हें ख़त्म करने के चक्कर मे मैंने अपनी साँसे पकड़ रख्खी हैं ताकि इन्हें समेट सकूँ इन हरामज़ादे बकचोदो की बजह से ही मेरा ये हाल हो गया है जो इतनी कमसिन उमर में मेरे पेसमेकर फिट कर दिया वरना डॉक्टरों की क्या मज़ाल थी जो मेरे सरीर को हाथ भी लगा देते।सालों ने मौके का फ़ायदा उठाकर मेरा सीना चीर दिया औऱ पुर्ज़ा फिट कर दिया वरना मेरी गाड़ी तो बिल्कुल ठीक चल रही थी एवरेज भी ठीक ही दे रही थी।बड़ी कुत्ती चीज़ होते हैं ये लम्बी ज़ुबान औऱ बात-बात पर नज़र मारने वाले,बच के रहियो मैं तो लपेटे में आ गया तुम देखलो अपनी,क़भी दोस्ती औऱ रिश्ते निभाने के चक्कर मे वक़्त से पहले ही निकल लो।आज कल के डॉक्टर भी क़िसी चम्बल के डाकुओं से कम न हैं घर तक बिक़बा दें औऱ बाद में डेड बॉडी देकर भेज दें।सही बता रहा हूँ, बाक़ी तुम देख लो। अरिनास शर्मा -----------------------
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