Tuesday, April 14, 2020

अध्भुत पुरुष

हम अगर सतयुग में जन्मे होते तो श्री राम के दर्शन होते,हम अगर महाभारत काल मे जन्मे होते तो श्री कृष्ण के दर्शन होते परन्तु हमने तो किसी ऋषी मुनी के भी दर्शन नही किये हैं।पर आज के युग में जिस तरह से मोदी जी देश और देशवासियों के लिए चिंतित हैं और हमारे लिए रात दिन एक किये हुए हैं ये भी कोई महान आत्मा ही कर सकती है।वो हमारे लिए किसी भगवान से कम नही हैं।हम लोगों को उनकी बताई हर बात का अनुसरण करना चाहिए।उन पर विश्वाश प्रभु पर विश्वाश करने के समान है।वो हमारे पिता तुल्य हैं।उन जैसा पुरुष अनेकों सदियों में अवतार लेता है।हमे पैसे के साथ साथ अपनी उम्र में से भी एक एक दिन उनके नाम कर देना चाहिए,ताकि उनका साया सदैव हमारे साथ रहे।

Wednesday, April 8, 2020

दर्द

किसको पता था,की ऐसा भी एक समय आएगा,हम अपने ही परिवार के लोगो से मिलना तो चाहेंगे परन्तु पास जाने की अनुमति नहीं होगी।कोरोना महामारी ने सभी को कैद कर के रख दिया।आज वन जीव बाहर ओर आदमी अंदर हो गए हैं।समय को देखते हुए अब यही जरूरी भी है कि हम अपने लिए ,अपनों के लिए घर में ही रहें।यही सब के लिए बेहतर है।धैर्य बनाये रखो।डर और झरे हमेशा नहीं रहतीं।ये दिन भी बीत जायेगें।घर मे रहे तो आने वाले दिन भी देख लेंगे,घूमें तो कहीं और ही नजर आएंगे।तस्वीर में,समझे।

Wednesday, March 25, 2020

राजा -प्रजा

देश में एक राजा होता था वो अपनी प्रजा को अपनी संतान की नजर से देखता था और प्रजा के सुख-दुख का पूरा खियाल रखता था।पिता भी अपने परिवार के लिए ऐसा ही करता है।अब समय बदल गया है,राजा की जगह प्रधानमंत्री जी ने ले ली है और प्रजा की जगह जनता का गई है।हमारे देश के प्रधानमंत्री मोदी जी भी पूरे देश वासियों को अपने परिवार के सदस्यों की तरह ही समझते हैं।वो एकमात्र ऐसे हैं जो आदेश नहीं बल्कि हाथ जोड़ कर बिनती करते हैं,की अपना खियाल रखें।आज कोरोना ने पूरे विश्व को हिलाकर रख दिया है,परन्तु हमारे मोदी जी हाथ जोड़ कर सब से घर में रहने को कह रहे हैं।कृपया सभी समझने की कोशिश करें कि वो किसकी भालाई के लिए हाथ जोड़ रहे हैं।समझदारी से काम लें और सहयोग करें।आप का जीवन आपके ओर देश के लिए महत्वपूर्ण है।आगे प्रभु इच्छा।

Tuesday, February 4, 2020

मानवता

हमारे समाज में अनेकों जातियां अनेकों धर्म मौजूद हैं परंतु मानवता कहीं नजर नही आती।हर तरफ गन्दी राजनीति के कारण धर्मों ओर जातियों को लड़ाकर बोट बैंक भरने में लगे हैं।नए नए लोग हिंसक विचारों के साथ बाहर आ रहे हैं।ये कोंन हैं और ऐसा क्यों कर रहे हैं?पर इतना पक्का है कि ये हिंदुस्तानी तो नहीं हैं।अगर ये हिंदुस्तानी होते तो यहां की धरोहर ओर यहां के लोगों को नूकसान नहीं पहुचाते।इनके बारे मे सभी को गम्भीरता से सोचना चाहिए।वरना भविष्य खतरे में है।

Wednesday, January 1, 2020

नज़र

नज़र में उठाना नज़र में गिराना ये औरत के हाथ में है।औरत कहे तो आदमी हीरो है औरत कहे तो आदमी ज़ीरो है।आदमी का चरित्र तब तक कोई नहीं बता सकता जब तक औरत ज़ुबा न खोले।घर बनाने वाली औरत ज़ुबा कम खोलती है और घर तोड़ने वाली औरत कभी जुबान रोकती नहीं।हमारे चरित्र में हमारा ही हाथ होता है परंतु समाज के सामने लाना या न लाना पत्नी के हाथ में होता है।इस को ग्रहस्ती कहते हैं।घर का संतुलन औरत के हाथ में ओर बाहर का संतुलन आदमी के हाथ में होता है।बस इतना ही समजना है।