Sunday, December 15, 2024
तपस्या
कई वर्ष पुरानी बात है,एक गाँव में एक परिवार में बाल विवाह हुआ,रीति रिवाज़ों के अनुसार बधू वर के घर पांच दिन रही औऱ छटे दिन वो अपने पिता के घर वापिस आ गई। रिवाजों के अनुसार जब दोनों बालिग़ हो जाएंगे तो पति अपनी पत्नी को पिता के घर से विदा करा कर ले आता है।अब समय गुजरा दोनों बच्चे बड़े हो गये।एक दिन पड़ोस में एक मेला लगा हुआ था,दोनों परिवार मेले में आये हुए थे।लड़की को अकेला घूमता देख अचानक लड़के ने देख़ा तो पहचान गया परन्तु लड़की ने नहीँ पहचाना। जब लड़के ने लड़की को रोक कर हालचाल पूछे तो लड़की ने ग़ुस्से में कहा,जान न पहचान तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे रोकने की।लड़के ने हसँ कर कहा,अरे तुम मुझे भूल गईं, चार दिन मेरे घर मेरे साथ रही हो और अब पहचान भी नहीँ रही हो।लड़की को साथ सोने की बात सुनकर ग़ुस्से में लड़के के गाल पर चपत मार दिया।लड़का गुस्से में वहाँ से चला गया। जब लड़की के घर वालों को पता चला तो उन्होंने लड़की को समझाया।लड़की बोली मेरी कोई ग़लती नहीँ थी कम से कम मुझे बताना चाहिए था मैं पहचान ही नहीँ पाई थी।अब समय आया बिदाई का तो लड़के ने साफ़ मना कर दिया।बोला,जिसनें मेले में मेरे चपत मार दिया उसे बुलाने का मतलब ही नहीँ है।जब घर वालों ने बहुत समझाया तो उसने ये शर्त रख दी कि यदि वो माफ़ी मांग ले तो में बुला लाऊंगा।जब ये ख़बर लड़की वालों के यहाँ पहुँची तो लड़की ने माफ़ी मांगने से तो मना कर दिया परन्तु ये बता दिया कि यदि वो बुलाने का जाए तो में चली जाऊँगी। बस लड़की ने माफ़ी नहीँ माँगी औऱ लड़का क़भी बुलाने नहीँ गया।समय गुज़रता गया दोनोँ की उम्र गुज़रती गई,पिता ने समझ लिया की बेटी ज़िद्दी है अब नहीँ जाएगी तो बेटी के नाम दस बीघा ज़मीन कर दी।ताकि आगे चल कर उसे क़िसी के आगे हाथ न फैलाने की ज़रूरत न पड़े।समय औऱ गुजरा बेटी के माता-पिता का भी देहांत हो गया।बेटी एक स्कूल में टीचर बन गई थी। दोनोँ ने अलग शादी भी नहीँ की थी।एक दिन सुसराल से ख़बर आई कि पति की तबियत बहुत ख़राब है अब वो उम्र के अंतिम पड़ाव पर है,एक बार आकर मिल लो।लड़की ने सोचा पूरे जीवन तो मुझे बुलाने नहीँ आया अब जाने से क्या फ़ायदा।मग़र मानवता के नाते वो एक बार मिलने ससुराल गई औऱ पति से मिली।पति नेपूछा,आ गईं चलो मैंने तुम्हें माफ़ किया,सब भूल जाना।पति ने अंतिम सांस ली। पति के ज़ायदाद के कागज़ घर वालों ने पत्नी के हाथ मे रख दिये।पत्नी ने कहा जब जीते जी ये मुझे लेकर नहीँ आये तो में इस दौलत का क्या करूँगी।उसने सारी दौलत उनके भाईयों के नाम कर दी औऱ वापस अपने घर आ गई।उसने कमरा अंदर से बंद कर लिया औऱ उसने भी अपनी अंतिम सांस लेकर अपना सफ़र पूरा किया। यह कहानी पात्र जगह सभी काल्पनिक हैं। अरिनास शर्मा।
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