Wednesday, December 18, 2019

पर्वत

पर्वत उचाईयों के बाद भी हमारे लिये पिघल जाते हैं।पर हम लोग उचाई पर जाकर अपनो को ही भूल जाते हैं।जो समझते हैं कि हमारे बराबर अब कोई नहीं वो अक्सर भीड़ में भी अकेले रह जाते हैं।एहसास उन्हें तब होता है अकेलेपन का जब परेशानी में अपने नज़र नहीं आते हैं।तब उनके पास आँसू होते है मगर वो भी नीचे गिर कर धूल में मिल जाते हैं।ऊँचा उठना पर्वतों से सीखो ओर पिघलना भी पर्वतो से सीखो।पर्वत हमें कुछ सीखा जाते हैं और हमारे अपने हमे एक दूसरे की नज़रों में ही गिरा जाते हैं।

2 comments: