Thursday, December 15, 2022
लघु कथा 4
छोटी सी एक चाय की दुकान पर चाय की चुस्की लेते हुये अचानक मेरी नज़र सड़क के दूसरी ओर खड़ी लड़की पर पड़ी,मुझे लगा काफ़ी देर से वो मुझ पर नज़र रखे हुये थी।अचानक एक कार आकर रुकी औऱ वो लड़की उसमें बैठ कर चली गई।चाय के पैसे देकर जैसे ही मैं चला तो चाय वाले ने बताया कि इस लड़की से बचकर रहना ये यहाँ के माफ़िया की बेटी है।मैं जब वहाँ से चला तो मैंने उस लड़की को कुछ लोगों के साथ हथियारों से लैस एक घर मे घुसते हुये देखा,मैं आगे बढ़ गया।रास्ते मे खड़े कुछ पुलिस वालों को जब ये जानकारी दी तो पुलिस हरकत में आ गई।मुझे साथ लेकर पुलिस महकमा फ़ोर्स के साथ मौके पर पहुँच गया।जब पुलिस ने उन्हें समर्पण करने को कहा तो उन्होंने फ़ायरिंग शुरू कर दी।काफ़ी देर मुठभेड़ के बाद जब पुलिस अंदर बिल्डिंग में पहुँची तो सभी ढेर हो चुके थे।वो लड़की भी उन्हीं में थी।तलाशी लेने पर भारी मात्रा में हथियार बरामद हुये।शायद वो किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने वाले थे।सही समय पर पुलिस को सचेत करने से बड़ा हादसा टल गया।हर नागरिक को ज़रा भी किसी पर शक हो या कहीँ ख़तरा लगे तो तुरंत पुलिस को सूचित करना चाहिये, इससे अनेक मासूमों की जान भी बचेगी औऱ बड़ा हादसा भी नहीँ होगा।अरिनास शर्मा।
Thursday, December 8, 2022
लघु कथा 3
एक दिन एक परिवार एक पिल्ला घर ले आये,औऱ प्यार से पालने लगे।जब वो बड़ा हुआ तो आने-जानें वालों पर भौकना शुरू कर दिया।कभी छत से तो कभी नीचे लॉबी से,जो भी घर के क़रीब से गुज़रता वो भौकने लगता।आस-पड़ोस के लोगों ने शिक़ायत करनी शुरू कर दी,घर वाले भी उसके इस व्यवहार से परेशान हो गये।एक दिन उन्होंने अपने कुत्ते को छोड़ने का फ़ैसला किया,औऱ शाम को शहर से दूर छोड़ आये।बड़ी शांति से रात बीती परन्तु एक दिन सुबह को जब उन्होंने फ़ाटक खोला तो उनका कुत्ता बाहर मरा मिला।उन्होंने उसका अंतिम सस्कार तो कर दिया मग़र उसकी मौत का कारण न जान पाये औऱ न ही ये समझ पाये कि इतनी दूर से वो वापिस कैसे आया।या तो कुत्ता पालो मत या पालने से पहले उसके व्यवहार औऱ उससे उतपन्न होने वाली सभी परेशानियों का सामना करने के लिये तैयार रहो।बे-ज़ुबान में भी जान होती है।उनको भी परिवार से बिछड़ने का ग़म होता है।अरिनास शर्मा।
Wednesday, December 7, 2022
लघु कथा 2
वो इंतज़ार में था तो बस मौत के,अकेला,बीमार,असहाय,गरीबी से जूझता हुआ एक ऐसा आदमी जिसकी बीबी के मर जाने के बाद उसके बच्चों ने भी घर से सिर्फ़ इसलिये निकाल दिया,क्योकि वो अब उन पर बोझ बन चुका था।बस अजनबियों की मदद से ख़ुद को ज़िंदा रखे हुए था,तो बस इस इंतज़ार में कि शायद एक दिन उसके बच्चों को उसकी याद आ जाये, औऱ वो उसे अपने साथ ले जायें, एक बेहतर ज़िन्दगी के लिये, मग़र कम्बख़्त वक़्त एक दिन धोका दे गया।वो जीना तो चाहता था मग़र शायद ज़िन्दगी उसे नहीँ चाहती थी,औऱ भूख़ औऱ बीमारी से वो हार गया,औऱ दुनियाँ को अलविदा कह गया।उसका क़सूर बस इतना था कि उसने अपने बच्चों को तो बेहतर ज़िन्दगी दी मग़र ख़ुद के लिये कुछ न रखा।ज़रा अपने बारे मे भी सोचा करो,ये ज़िन्दगी हँसाती कम है रुलाती ज्यादा है।अरिनास शर्मा।
Tuesday, December 6, 2022
लघु कथा 1
तेज़ आँधी-तूफ़ान औऱ गरजते बादलों के साथ बारिश रात्री का समय क़िसी ने मेरे घर की डोरबेल बजाई।मैंने आधी नीँद में दरवाज़ा खोला तो बाक़ी की नीँद भी रफ़ूचक्कर हो गई।मेरे सामने एक महिला अपने तीन छोटे बच्चों के साथ ऊपर से नीचे तक भीगी हुई,ठंड से सभी काँपते हुये खड़े थे। महिला रोते हुये बोली,साब मैं बहुत ग़रीब हूँ अचानक तूफ़ानी बारिश में घिर गई हूँ, बच्चे भी बुरी तरह भीग गये हैं, घर दूर है,अब जाना मुमकिन नहीँ है हो सके तो आज रात आसरा दे दो,सुबह होते ही मैं बच्चों को लेकर चली जाऊँगी।उन्हें इस हालत में देख कर क़िसी को भी दया आ जाती।मैंने तुरन्त उनको अंदर बुला लिया।सभी भीगे औऱ काँपते हुये एक कोने में बैठ गये।मेरे बीबी-बच्चे तो एक कार दुर्घटना में मारे गये थे,तो मैंने अपने बच्चों के कुछ कपड़े औऱ एक साड़ी लाकर दे दी।एक कमरे में जाकर सभी ने अपने पुराने भीगे कपड़ों को उतार कर नये कपड़े पहन लिये।जब मैंने उनसे खाने को पूछा तो पता चला कि सभी सुबह से भूखे थे।मैंने फिरिज़ से कुछ फल,ब्रेड,खाना निकाल कर दे दिया।सभी ने पेट भरकर खाया।मैंने एक कमरे में उनका सोने का प्रबंध कर दिया।रात-भर सोफ़े पर बैठे-बैठे में सोचता रहा कि न जानें कितने परिवार बारिश की सर्द रातें भूखे पेट सड़क पर गुज़ारते होंगे ।सुबह होने से पहले ही मैंने फ़ोन करके खाना मंगा लिया।सुबह उनको खाना ख़िलाकर औऱ कुछ पैसे किराये के देकर विदा किया।पता नहीँ क्यों एक अज़ीब से सुकून की अनुभूति हुई।लगा जैसे मेरे बीबी-बच्चे खुश होकर मुझे देख रहे हैं, औऱ वो जहाँ भी हैं बहुत खुश हैं। अरिनास शर्मा।
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