Wednesday, December 7, 2022

लघु कथा 2

वो इंतज़ार में था तो बस मौत के,अकेला,बीमार,असहाय,गरीबी से जूझता हुआ एक ऐसा आदमी जिसकी बीबी के मर जाने के बाद उसके बच्चों ने भी घर से सिर्फ़ इसलिये निकाल दिया,क्योकि वो अब उन पर बोझ बन चुका था।बस अजनबियों की मदद से ख़ुद को ज़िंदा रखे हुए था,तो बस इस इंतज़ार में कि शायद एक दिन उसके बच्चों को उसकी याद आ जाये, औऱ वो उसे अपने साथ ले जायें, एक बेहतर ज़िन्दगी के लिये, मग़र कम्बख़्त वक़्त एक दिन धोका दे गया।वो जीना तो चाहता था मग़र शायद ज़िन्दगी उसे नहीँ चाहती थी,औऱ भूख़ औऱ बीमारी से वो हार गया,औऱ दुनियाँ को अलविदा कह गया।उसका क़सूर बस इतना था कि उसने अपने बच्चों को तो बेहतर ज़िन्दगी दी मग़र ख़ुद के लिये कुछ न रखा।ज़रा अपने बारे मे भी सोचा करो,ये ज़िन्दगी हँसाती कम है रुलाती ज्यादा है।अरिनास शर्मा।

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