Tuesday, December 6, 2022
लघु कथा 1
तेज़ आँधी-तूफ़ान औऱ गरजते बादलों के साथ बारिश रात्री का समय क़िसी ने मेरे घर की डोरबेल बजाई।मैंने आधी नीँद में दरवाज़ा खोला तो बाक़ी की नीँद भी रफ़ूचक्कर हो गई।मेरे सामने एक महिला अपने तीन छोटे बच्चों के साथ ऊपर से नीचे तक भीगी हुई,ठंड से सभी काँपते हुये खड़े थे। महिला रोते हुये बोली,साब मैं बहुत ग़रीब हूँ अचानक तूफ़ानी बारिश में घिर गई हूँ, बच्चे भी बुरी तरह भीग गये हैं, घर दूर है,अब जाना मुमकिन नहीँ है हो सके तो आज रात आसरा दे दो,सुबह होते ही मैं बच्चों को लेकर चली जाऊँगी।उन्हें इस हालत में देख कर क़िसी को भी दया आ जाती।मैंने तुरन्त उनको अंदर बुला लिया।सभी भीगे औऱ काँपते हुये एक कोने में बैठ गये।मेरे बीबी-बच्चे तो एक कार दुर्घटना में मारे गये थे,तो मैंने अपने बच्चों के कुछ कपड़े औऱ एक साड़ी लाकर दे दी।एक कमरे में जाकर सभी ने अपने पुराने भीगे कपड़ों को उतार कर नये कपड़े पहन लिये।जब मैंने उनसे खाने को पूछा तो पता चला कि सभी सुबह से भूखे थे।मैंने फिरिज़ से कुछ फल,ब्रेड,खाना निकाल कर दे दिया।सभी ने पेट भरकर खाया।मैंने एक कमरे में उनका सोने का प्रबंध कर दिया।रात-भर सोफ़े पर बैठे-बैठे में सोचता रहा कि न जानें कितने परिवार बारिश की सर्द रातें भूखे पेट सड़क पर गुज़ारते होंगे ।सुबह होने से पहले ही मैंने फ़ोन करके खाना मंगा लिया।सुबह उनको खाना ख़िलाकर औऱ कुछ पैसे किराये के देकर विदा किया।पता नहीँ क्यों एक अज़ीब से सुकून की अनुभूति हुई।लगा जैसे मेरे बीबी-बच्चे खुश होकर मुझे देख रहे हैं, औऱ वो जहाँ भी हैं बहुत खुश हैं। अरिनास शर्मा।
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