Friday, July 11, 2025

अ----ज्ञानी

ये बात एक ऐसे घर की है,जहाँ सभी बैठे हँसी-ठिठोले कर रहे थे,कि अचानक बात-बात में एक ऐसी बहस छिड़ गई जिसकी क़िसी को भी उम्मीद नहीँ थी।बात शुरू हो गई यूट्यूब-गुगल के ज्ञान की।जिसने शुरूबात की वो सज्जन बेहद यूट्यूब-गुगल प्रेमी थे।दूसरे सज्जन सनातन धर्म औऱ अपने वेद-पुराणों में विशवास रखने वाले थे।                                अब मोबाइल प्रेमी अपने यूट्यूब ज्ञान के आगे सभी बातों को काटे जा रहे थे या यूँ कहें कि ख़ुद को सर्वश्रेष्ठ-सर्वज्ञानी साबित करने पर तुले थे।तो फ़ैसला ये हुआ कि धर्म से जुड़े सज्जन ने प्रस्ताव ऱखा कि यदि तुम मेरे कुछ सवालों के जवाब दो तो तर्क शुरू होगा।यदि लगे कि तुम ग़लत हो तो शांत हो जाना।गुगल प्रेमी तैयार हो गये,तो पहला सवाल आया कि,गूगल का निर्माण किसने किया औऱ इसमें समलित जानकारियां कहाँ से आईं?"जवाब आया"आदमी के द्वारा।"दूसरा सवाल"यूट्यूब का निर्माण औऱ जानकारियां कहाँ से आईं।"जवाब आया"आदमी के द्वारा।"तीसरा सवाल"आदमी के पास इतना दिमाग़ इतने सवालों के जवाब कहाँ से आये।"जवाब आया"कालेज की किताबों से"चौथा व अंतिम सवाल"वो किताबें किसने लिखीं जिनको पड़कर दूसरा आदमी इतना क़ाबिल बन गया।"जवाब आया"वो भी आदमी ने लिखीं"ठीक है।ये निचोड़ तो निकला यूट्यूब औऱ गूगल बाबा के ज्ञान के रास्ते का।                                                                अब आते हैं सनातनी ज्ञान की क़िताबों की ओर, तो पहला सवाल"हमारे ग्रँथ, वेद-पुराण, धार्मिक किताबें किसने लिखीं"?जवाब आया"ऋषी-मुनियों ने"दूसरा सवाल"श्री रामायण, भगवत गीता,शिव-पुराण, गरुड़-पुराण, भविष्य-पुराण, गरुण-कथा,सभी देवी-देवताओं के चालीसा-आरतियाँ किसने लिखीं?"जवाब आया"ऋषी-मुनियों औऱ आचार्यों ने।"ठीक है।।                                      अब तुम्हारी जानकारी के लिये ये भी बताता चलूं कि एक तरफ़ एक साधारण आदमी ने स्कूली पड़ाई कर के जो ज्ञान हॉसिल किया वो सही औऱ अकाट्य सत्य है या दूसरी तरफ़ इन ऋषी-मुनियों ने घोर तपस्या कर के जो ज्ञान हॉसिल किया,जिन महान विभूतियों ने बड़े-बड़े गुरुकुल में ज्ञान प्राप्त करके जो हॉसिल किया वो सत्य है।"                                                                                                ज़रा गम्भीरता से विचार करो फ़िर सनातन धर्म-सनातन ज्ञान पर उंगली उठाओ।यूँ ही हर बात पर गूगल खोलकर बैठ जाते हो,यूट्यूब पर खोजने लगते हो औऱ फ़िर सामने वाले को नीचा दिखाने की ठान लेते हो,इससे साफ़ ज़ाहिर होता है कि तुम से बड़ा मूर्ख-तुम से बड़ा अज्ञानी कोई औऱ नहीँ है।दूसरे को नीचा दिखाना महानता नहीँ है बल्कि आधे ज्ञान के साथ प्रवचन देना औऱ उस अधूरे ज्ञान को सत्य साबित करना बहुत ही घातक औऱ मूर्खता है।                                                             सही ज्ञान प्राप्त करना है तो मोबाइल पड़ना छोड़ो औऱ अच्छी किताबें पड़ने की आदत डालो।घर बैठे अच्छी-अच्छी किताबें डाक द्वारा मंगाओ औऱ अधूरे ज्ञान औऱ वाहियात वीडयो देखने की वजह अपने घर मे एक छोटी लायब्रेरी का निमार्ण करो।बच्चों को भी किताबें पड़ने की आदत डलवाओ औऱ मोबाइल की लत छुड़वा दो,तभी तुम्हें भी सही ज्ञान की प्राप्ति होगी औऱ तुम्हारा आने वाला कल भी सुरक्षित होगा।।                                                                                   एक विचार।                                                                                 लेख़क।                                                                         अरिनास  शर्मा ।।                                                                   ---------------------------                                                               ----------------------------

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